In Defence of the Demigod

An unconditional apology by an officer would always be seen as an admission of guilt. Hence, some excuse or justification must always be added to it. An unconditional statement on a subordinate’s action would be construed as censure by the superiors or the Service Association. Hence reprimand the one in the dock, but also endorse…

वोक अफसरों को गुस्सा आता है तो ज्वालामुखी फटता है

जीवन में कभी मानस नहीं बाँची, हाथ में वाल्मीकि रामायण नहीं उठाई, अट्ठारह पुराणों के नाम नहीं गिना सकते, उपनिषद लिखा जाता है या उपनिशद- नहीं जानते, षडदर्शन को सिविल सेवा परीक्षा का प्रोबेबल टू-मार्कर जानकर रटा, तीर्थयात्रा जाना पड़ा तो उसे ट्रेकिंग बताया, महीनों से मंदिर में नहीं घुसे हैं, हवन का ह नहीं…

MOOD POST OFFICE

(1) Ordeal finally over, Six! gently screams, The steadfast clock, Disinterested, unconcerned, The sincerely lazy lizard Just sleeps off. (6) Again, the sun sets, Sets to rise again, Rise in the same garb, To perform the same job. (10) Who pays the Sun? Why does it burn? Day and night, East to west, Whose race…

सरकारी टॉवल नहीं हटाऊंगा  !

  कुर्सी पर सफ़ेद टॉवल देखते हैं , तो वे जलते हैं । जो सतरंगी हो, तो खिल्ली उड़ाते हैं । लेकिन सबसे घोर चिढ़न उन्हे होती है पीताम्बर या भगवा टॉवल देख कर । पर अब करें तो क्या करें ? हर किसी नत्थुगैरे की मनोकामना पूरी करने का ठेका तो हमने ले नहीं…

बहुत सर-सर हुआ सर ! अब हम तो सफ़र करते हैं !

(नौकरी तो बोस ने भी छोड़ी थी , पर वह बात कुछ और थी )   “बहुत सर-सर हुआ सर , अब सर उठा के चलेंगे, आगे पढ़ेंगे , आगे बढ़ेंगे , व्यापार करेंगे , कहानियाँ गढ़ेंगे , मन की सुनेंगे  , मन की कहेंगे , क्रांति लाएँगे , क्रांति बनेंगे, जितना बचा है जीवन…

पुलिस बेचारी और करती भी क्या ?

    पुलिस बेचारी और करती भी क्या ? चारों दुर्दांत द्रुत धावक निकले, पलक झपकते ही सौ मीटर भग लीस, सिपाही उसेन बोल्ट तो हैं नहीं , पर शार्प शूटर गजब के निकले , धाँय-धाँय धाँय-धाँय और चारों ढेर ! (6)   पुलिस बेचारी और करती भी क्या ? भीड़ से बचाकर लाए थे…

ख़ाकी को धरना देने का क्रेज़ हुआ है (कविता)

  खाकी को धरना देने का क्रेज़ हुआ है, बहुत हैरान,परेशान बेचारा रंगरेज हुआ है, करनी होगी अब वर्दी पर चूने से पुताई, लाल-सफ़ेद सब मिट जाएगा जब होगी धुलाई, जब से है लौकप में उनपर ही थर्ड डिग्री लगाई, पुलिस कैप पर है तब से ही गांधी टोपी चढ़ाई , काले कोटों का जबसे…

खाकिस्तान फिर भी चल जाएगा पर नहीं चाहिए ए कंट्री ऑफ ब्लेक कोट्स

  खाकी वर्दी को सिस्टम के एनफ़ोर्सर होने का गुमान है । काले कोट को सिस्टम के मेनिपुलेटर होने का । जानते दोनों ही हैं कि सिस्टम के माई –बाप- हुज़ूर नेता-मंत्री हैं । अदालतों में बार के चुनाव की बयार चल रही है । ऐसे में लौकप में घुस कर पुलिसवालों के साथ मार-कुटाई…

कॉमरेड कन्नन को नमस्ते करो !

  सेक्रेड गेम्स में गुरुजी बताते हैं कि कलयुग की कालिमा सृष्टि पर पूरी तरह से छा चुकी है और अगर सतयुग के समाज की पुनर्स्थापना करनी है तो सबको बलिदान देना होगा । जिहाद,जलवायु परिवर्तन और जनसंख्या विस्फोट से झूझ रही इस दुनिया में प्रतिपल कहीं न कहीं ,किसी न किसी पर अस्तित्व का…

रिपोर्टनामा

  (By Abhinav Pancholi) कविता का भाव – एक रिपोर्ट ,दो…तीन…दस…तेरह…अनगिनत रिपोर्टें भेजकर चरितार्थ हुआ मेरा जीवन चौदह रिपोर्टें बनाकर भेज चुका हूँ सुबह से, उन्नीस बार उम्मीदों से सेंड बटन दबाया है , पचीस बार अमेंड हो चुकी हैं कुल मिलाकर अथक डिस्कशन-हाईपर रिएक्शन के उपरांत, बारह दफा ऊपर जाकर रिमांड बैक हुई हैं,…

रेड रोड पर इंसाफ की इरादतन हत्या – इतिहास में जब-जब पुलिस को झुकने को कहा गया,वह रेंगी है

  वारदात करते समय संबिया ऑडी क्यू 7 चला रहा था । तीन साल बाद अदालत से बरी होने के बाद  वह स्वयं ही  एक सफ़ेद पॉर्श चलाकर अपने घर लौटा । यूं वो किसी ड्राईवर के साथ बैठकर भी जा सकता था लेकिन खुद गाड़ी चलाकर उसने बंगाली समाज और सिस्टम को जोरदार तमाचा…

मल गया उछल , सन गया सत्ता का मलमल

  महकमा  बन गया है एक गुरुत्वहीन पाख़ाना , जहाँ मल हवा में उछल रहा है ,तैर रहा है, पंखों  से टकरा टकरा कर छिटक जाता है  , छत-दीवारों पर मॉडर्न आर्ट की तरह चिपक गया  है ।1।   गुरुत्वाकर्षण नहीं रहा अब , बस बड़े-बड़े गुरु बैठे हैं , फाइलों पर रख-रख कर मल,…