कुफ़्र-काफिर पर ऐतराज नहीं, झांट-झंटुए और *टुए पर है ? (निबंध)

परसों तक सब्र ही तोड़ते थे, कल कुफ़्र भी तोड़ दिया । सब्र का क्या है साहब । हम लोग काफिर हैं, बारह सौ साल से बुतशिकनों की नफरत खत्म होने का इंतज़ार कर रहे हैं । कश्मीर में आज भी हमारे लोग मारे जा रहे हैं । शर्म बस हमें आती नहीं । क्रिकेट…

प्रदीप बनाम वोक् मीडिया – शब्द तो बहाना है, सत्य को दबाना है

हंगामा है क्यों बरपा,मुँह से निकला एक शब्द ही है,न्याय ही तो है माँगा,लिंचिंग तो नहीं की है. सड़कों पे नहीं बैठा,बेअदबी तो नहीं की है,कुछ सवाल ही हैं पूछे,दलाली तो नहीं ली है. सच्चाई उगलती, तीखे सवाल पूछती प्रदीप भंडारी की जिह्वा से हिंदी का एक आधिकारिक शब्द क्या निकल गया, तब से यह…

और क्या चल रहा है ?

डीजल का शतक लग चुका है , पेट्रोल नेल्सन पर है । रसोई गेस नौ सौ पार कर चुकी है, जल्द ही हजारी भी होगी । आज लगातार सातवें दिन कीमतें बढ़ी हैं । विकास ऊंची उड़ान पर है – गुरुत्वाकर्षण को पर करके अन्तरिक्ष पहुँच गया है । उड़ान कंपनी टाटा हो चुकी है…

अमूल माचो एवं लक्स कोज़ी – उर्दूवुड की चड्ढियाँ

रश्मिका मंदाना गिनती ही भूल जाती है । तीन से चार तक आने में तीन दशमलव एक-दो-तीन हो जाती है । क्या है कि कमसिन कन्या की नज़र विकी कौशल के कच्छा स्ट्रेप पर पड़कर वहीं अटक गयी है- एकदम संज्ञा शून्य स्थिति । तानसेन को राग टोढ़ी गाता सुनकर मृग समूह जैसे कभी मंत्रमुग्ध…

दिन में अमिश रहता हूँ, रात को रवीश हो जाता हूँ

रो-जर फेडरर को हार और जीत पर फूट-फूट कर रोते देखा है। स्वयं बाबा ने भी सदन में आँसू बहाये हैं। वधु की विदाई के समय बहुत से वरों के नेत्र सजल होते देखे हैं । सेकंड वेव ने ऐसा विध्वंस मचाया कि प्रधान जी की आँखेँ भी डबडबा गईं । लेकिन रोना-रोना तो रवीश…

फ़ाल्टन्यूज़ ने थूक के चाटा जब यूपी पुलिस ने मारा सच का चांटा

फ़ाल्टन्यूज़ नाम का एक गिरोह फर्जी खबरें बनाने, चलाने और सच के साथ छेदछाड़ कर नेटिज़न्स को बरगालने के काम में रिपब्लिक ऑफ ट्विटर पर अत्यधिक सक्रिय है । इस फ़ाल्टन्यूज़ को चलाने वाले दो वामपंथी दलाल – एक गंजा और किसी चिड़ियाघर से भागा एक भालू- किसी भी खबर में हेराफेरी कर उसे सत्यनिष्ठा…

मोबाइल नर नारायण : मोबाइल हाथ में लेकर एकला चलो रे !

चलते पंखे की आवाज़ आपको बीतते हुए समय का एहसास कराती है । घड़ी की सुइयों को रेंगते देखकर मन में गिंडोले सरकने लगते हैं । बहता हुआ नल अगर मटके या बाल्टी को भर रहा है तो समृद्धि का , पर अगर फिजूल पानी खर्च हो रहा है तो बरबादी का भाव देता है…

JE SUIS CHARLIE: Now & Forever

“I was Charlie Hebdo” in 2015 when two jihadi brothers shot and killed their Editor, his bodyguard, four cartoonists, two columnists, a copy editor, a caretaker, a guest and a cop at their office for ‘having dared’ to publish the cartoons of the Prophet. Another lady cop and four Jews had also succumbed in a…

NO MORE LIES – PARTITION WAS A THOROUGHLY  COMMUNAL EXERCISE

  Historians and journalists have been very kind towards the Indian National Congress . But history will not be as unsparing. Truth has a way of catching up  and exposing everyone for what they actually were . One can hide or be hidden by apologists and sympathisers for a long time, but ultimately truth shall…