और क्या चल रहा है ?

डीजल का शतक लग चुका है , पेट्रोल नेल्सन पर है । रसोई गेस नौ सौ पार कर चुकी है, जल्द ही हजारी भी होगी । आज लगातार सातवें दिन कीमतें बढ़ी हैं । विकास ऊंची उड़ान पर है – गुरुत्वाकर्षण को पर करके अन्तरिक्ष पहुँच गया है । उड़ान कंपनी टाटा हो चुकी है । जन धन, पेयजल एवं उज्जवला का बहुत हो-हल्ला है । सरकार ने करोड़ों को लाखों देकर हजारों आवास बनवा दिये हैं । पाकिस्तान में बेरोजगारी बढ़ी है । भारत में रोजगार के प्रार्थी बढ़ गए हैं । सुनते हैं कोयले की किल्लत के चलते भीषण पावरकट अवश्यंभावी हैं । ऐसा दिल्ली में संभव है जहां कोयला प्लांट दो साल से बंद स्थिति में हैं । रेज़री की फितरत आप जानते हैं – जूता किसी का भी फटे, पैर में छाले उसी के होने हैं । 

पब्लिक आजकल गहरे नशे में है । दस-बीस ग्राम कोकीन और हशीश नरकोटिक्स विभाग ने एक क्रूज से जब्त कर लिया है । एक साहबज़ादे को रिमांड पर लिया गया था, अब वह जेल में है । एक च्विंगगम ने उसके बाप बादशाह खान को फोन पर हड़का दिया बताया । बादशाह बेचारा सदमे में है, खान पार्टी खतरे में है । साहिबज़ादे पर से न नशे का सामान बरामद हुआ, न ही वह नशे में धुत्त था । लेकिन आप मानते ही नहीं कि व्हाट्सेप करना भी अपराध की श्रेणी में आता है । आप सभी लाइन में हैं ।  तीन हज़ार किलो ड्रग्स भी पकड़ी गयी हैं । दिल्ली, मुंबई, मूंदरा – तालिबान का निर्यात सब जगह पहुंचाया जा रहा है । इन खेपों को पकड़ पाने की वजह से जांच अजेंसियाँ निशाने पर हैं । जाने देतीं, तो किसको बुझाता ? ऐसी मूर्खता आजकल फेशन में है ।

कश्मीर में एक केमिस्ट, एक गोल गप्पे वाला, टैक्सी यूनियन का अध्यक्ष और दो शिक्षक पिछले हफ्ते मौत की घाट उतार दिये गए । जिहादियों नें उन्हें अंधाधुंध भी नहीं मारा , आखिर वे इतने जल्लाद नहीं हैं । पहले आधार कार्ड मांगा, मजहब कनफर्म किया, और उसके बाद ही बदनीयत काफिरों को गोलियों से भूना । कश्मीर काफिरों के लिए नहीं है, वह दारुल इस्लाम है । संदेश स्पष्ट है और लक्ष्य पर लगा है । इन घटनाओं से घबराए कश्मीरी हिन्दू पुनः पलायन करने पर मजबूर हैं । इस कारण देश के कुछ उग्र हिन्दू इन्हीं से नाराज़ हो गए हैं । वे चाहते हैं कि कश्मीरी पंडित और हिन्दू की पहचान में फसे घाटी के ये बेचारे काफिर जिहादियों का डट कर वहीं मुक़ाबला करें । क्या हथियार खरीदना इतना सुगम है? क्या सरकार या सेना इन प्रताड़ितों को इतनी आसानी से असला इत्यादि मुहैया करा देगी या खरीदने देगी ? इस बात से याद आया कि भारत को रेपिस्तान करार देने वाला नौकरशाह अभी नौकरी में है या नहीं ? सिस्टम की गुड बुक्स में लौट आया है, ये तो खबर है ।

कहीं पर एक एसयूवी ने चार किसान कुचल डाले और भीड़ ने फिर ड्राइवर और यात्रियों को पीट-पीट कर मार दिया । किसी ने एयरपोर्ट पर धरना दिया, किसी ने गेस्ट हाउस में झाड़ू लगाया । केमरा हर जगह मौजूद रहा । फेसबुक, व्हाट्सएप और इन्स्टाग्राम भले एक रात के लिए शांत हो गए हों, पर ट्विटर पर गहमागहमी बनी रही । एक रोज़ अफवाह उड़ी कि समन की अवहेलना कर आरोपी मंत्रीपुत्र नेपाल निकल लिया है । पुलिस ने उसे अगले दिन आने का आदरपूर्वक निमंत्रण भी दिया जो उसने अंततः स्वीकार किया । थाने में आवभगत के उपरांत उसे गिरफ्तार कर लिया गया । उसके बाप का भविष्य आधार में है । जिन दरिंदों ने एसयूवी के ड्राइवर समेत चार लोगों की लिंचिंग की थे , वे निश्चिंत हैं । उनका बाल भी बांका नहीं हुआ है । स्याही और खून अभी गीले हैं । ।  हर गुंडे में आधे देश को किसान नज़र आ रहा है । हर किसान में बाकी आधा भारत उपद्रवी तलाश रहा है । कुल मिलाकर स्थिति शांत लेकिन तनावपूर्ण बनी हुई है ।

सुनने में आया है कि महाराष्ट्र का एक पूर्व मंत्री फरार है । उसका धुर-विरोधी पुलिस अफसर भी लापता है । क्या दोनों एक साथ ही भाग लिए हैं ? चुनाव थमे से हैं । पर चुनावी बयार कभी थमती नहीं । वैसे बंगाल विधानसभा उपचुनाव, और गुजरात पालिका चुनाव के नतीजे इसी हफ्ते आए हैं । एमपी में एक महीने से प्रचार चल रहा है । प्रचंड वेग से यू पी का बुखार चढ़ा गया है । अब उतारने के आसार नहीं हैं । सर्वमीडिया चमचागीरी में मशगूल है, सर्वनेतागण चटवाने में व्यस्त हैं ।

देश नक्शे पर है । राष्ट्र अधरझूल में है । भावनाएं मर चुकी हैं । हम डेढ़ सौ करोड़ होने को हैं । चीनी लद्दाख में बैठे हैं । उत्तराखंड और अरुणाचल में भी घुसपैठ हुई है  । पंजाब में ड्रोन पर ड्रोन आ रहे हैं । कप्तान की विदाई हो चुकी है । शेरी अभी भी उद्विग्न है । चन्नीयुग का आरंभ हो चुका है । पाकिस्तान मज़े में हैं , इमरान बीडेन के फोन के इंतज़ार में है । मीडिया का पूरा ध्यान तालिबान पर है । सरकार का ज़ोर आयुष्मान पर है । आम आदमी स्कूलों में ‘कट्टर देशभक्ति’ पढ़ाने लगे हैं । एक मुंतशिर कवि बबलूनुमा आवाज़ में उर्दू और मुग़लों को गरिया रहा है ।  चोरी पकड़े जाने पर सीनाजोरी कर रहा है, पर अपना अरबी तखल्लुस त्यागने में आनाकानी कर रहा है । चेटन हगत लगातार हग रहा है । उसका कांट्रैक्ट चिरकाल के लिए है ।

केरल छोड करोना बाकी जगह नियंत्रण में है । नियंत्रण में तो केरल में खैर लव जिहाद और नार्को जिहाद भी नहीं हैं, पर वह सब फिलहाल रहने दीजिये । तीज-त्योहार उत्साह से मनाए जा रहे हैं । शॉपिंग दबादब हो रही है । मास्क उतर चुके हैं , या यों कहिए मास्क फेंके जा चुके हैं । मानसून निकल लिया है । पूजा चल रही है , दशहरा, ईद और उसके उपरांत दीवाली आने को हैं । पटाखे प्रतिबंधित कर दिये गए हैं । सांस लेने की अनुमति है , इसलिए ले रहे हैं । नवंबर- दिसंबर में अनुमति रहे न रहे , क्वालिटी नहीं रहेगी तो सांसें थाम कर बैठेंगे  ।

कुल मिलाकर अभी सब कुछ ठीक-ठाक है ।

केवल हर जाति को लगता है कि उसका अधिकार मारा जा रहा है,

और हर धर्म का अस्तित्व संकट में है ।


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